Chaha tha humne jo Paaya kya humne wo

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चाहा था हमने जो पाया क्या हमने वो
यही इक सवाल है किया था तुझसे जो
तू टालता रहा हमे हर वक़्त हर घडी
हम भी बैठे रहे ये सोच के की परीक्षा है ये कड़ी
ना जान पाए हमे ये की कोई जवाब ही नहीं है तेरे पास
होता भी कैसे कुछ ये तो थी मेरी इक झूठी आस
वक़्त रहते न समझ पाए हम तेरी इस चाल को
फस गए हम ना भेद पाए तेरे इस जाल को
कठपुतली बना कर के खेल तूने हमसे खेला
हम भी नाचते रहे ये सोच के की है ये ज़िन्दगी का मेला
तू जान ना पाया क्या थी हमारे दिल की व्यथा
देखा भी जिसने हमे देखते ही वो हंसा
अब कोसते हैं हम खुद को क्यों किया तुज्पे भरोसा
तूने तो ज़िन्दगी की थाल में गम ही हमें परोसा
जानते ना थे हम की ज़िन्दगी इतने आंसू देगी
पर वो भी क्या करे तूने मेरी ज़िन्दगी गिले कलम से जो लिखी
चाहत थी इक शांत प्यार भरा जीवन व्यतीत करूँ
तूने पर बस यही सोचा कैसे इस ज़िन्दगी को काँटों से भरू
तन्हाई में सोचते हैं क्यों बाँधी हमने ज़िन्दगी से कोई आस
ना कोई पल ना कोई लम्हा रहा ख़ुशी का मेरे पास
आज भी बहुत से सवाल बाकी हैं तुझसे पूछने
पर मिलेगा भी कोई जवाब या नहीं लगते हैं यही सोचने
टूट कर बिखर कर रह गयी ये मेरी ज़िन्दगी
पतझड़ के पत्तों की तरह इधर से उधर उड़ रही
आज भी वो इक सवाल बाकी है किया था कभी तुझसे जो
चाहा था हमने जो पाया क्या हमने वो???

Life

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ये रस्ते यूँ ही कटते चले जा रहे हैं
मंजिल को पाने की चाह में दिन ढले जा रहे हैं
ना जाने कब मिलेगी हमारी ये मंजिल हमें
इसी इंतज़ार में हम भी जीए जा रहे हैं