Waah! Baadal Tune Kya khel Dikhaya

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पसीने से लतपत हुआ,
सड़्क पर चल रहा.
सूर्ज महाराज की गर्मी सहता,
मैं चल रहा .

म्नज़िल अभी दूर थी,
सूर्य का केहर था
हालत मेरी बुरी थी,
ना जाने कितना चलना था .

कहीं से वह काले बाद्ल आए,
ठंडी हवा साथ लेकर आय.
गुड़-गुड़, गुड़-गुड़ की धुन गाए,
पानी की वह बूंदे टपकाए .

अब सूर्ज ना दिखाई दिया,
वह डर कर कहीं छिप गिया.
मैं खुशिओ से झूमने लगा,
वाह ! बाद्ल तूने कया खेल दिखाया .

अब बारिश से लतपत हुआ,
घर को जा रहा .
ममी जी की डाँट सहता,
कपड़े अपने धो रहा …..

वाह ! बाद्ल तूने कया खेल दिखाया

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पसीने से लतपत हुआ,
सड़्क पर चल रहा.
सूर्ज महाराज की गर्मी सहता,
मैं चल रहा .

म्नज़िल अभी दूर थी,
सूर्य का केहर था
हालत मेरी बुरी थी,
ना जाने कितना चलना था .

कहीं से वह काले बाद्ल आए,
ठंडी हवा साथ लेकर आय.
गुड़-गुड़, गुड़-गुड़ की धुन गाए,
पानी की वह बूंदे टपकाए .

अब सूर्ज ना दिखाई दिया,
वह डर कर कहीं छिप गिया.
मैं खुशिओ से झूमने लगा,
वाह ! बाद्ल तूने कया खेल दिखाया .

अब बारिश से लतपत हुआ,
घर को जा रहा .
ममी जी की डाँट सहता,
कपड़े अपने धो रहा …..