सोचा था घर बनाक

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सोचा था घर बनाकर बैठूंगा सुकून से, पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफिर बना डाला
सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब, बचपन वाला इतवार अब नही आता

हरिवंश राय बच्चन

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